03 मार्च को विश्व श्रवण दिवस (विश्व सुनवाई दिवस) 2021

 



प्रत्येक वर्ष 03 मार्च को विश्व श्रवण दिवस (विश्व सुनवाई दिवस) मनाया जाता है। इस दिन पूरी दुनिया में बहरेपन को लेकर जागरुकता के लिए विश्व श्रवण दिवस मनाया जाता है। आधुनिक युग में लोग अपने वजन पर अधिक नहीं पाते हैं और मोटापा से ग्रसित लोगों में बहरेपन का खतरा अधिक होता है।


विश्व श्रवण दिवस पहली बार वर्ष 2007 में आंतरिक कान देखभाल दिवस द्वारा विश्वभर में मनाया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा आंतरिक और राष्ट्रीय स्तर पर विशेष विषय से संबंधित घटनाओं की कई किस्में बनाई गई हैं।

सुनने की क्षमता में कमी या बहरापन एक ऐसी स्थिति है, जहाँ व्यक्ति अपनी श्रवण-क्षमता अर्थात सुनने की क्षमता खो देता है। यह रोग अनुवांशिक कारणों, जन्म के समय जटिलताओं, कुछ संक्रामक रोगों, कान में लंबे समय तक संक्रमण, ऑटोटॉक्सिक दवाओं के उपयोग और अत्यधिक शोर और उम्र बढ़ने से होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि, दुनिया की 5 प्रतिशत आबादी में सुनने की समस्या का आंशिक या पूर्ण रूप से नुकसान है। 65 वर्ष से ऊपर की आयु वर्ग के लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस बीमारी में से ज्यादातर दक्षिण एशिया, एशिया प्रशांत और उप-सहारा अफ्रीका क्षेत्रों में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में लगभग 36 करोड़ लोग सुन नहीं सकते। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में पचास लाख से ज्यादा आबादी बहरेपन की समस्या से पीड़ित है। विश्व की लगभग पाँच प्रतिशत जनसंख्या सुनने से लाचार है।

सुनने की क्षमता में कमी के मुख्य कारण उम्र बढ़ने, जोरदार शोर होना, आनुवंशिकता, हानिकारक या अन्य बिमारियों में दी जाने वाली दवा, शराब या तंबाकू, कान का संक्रमण, चोट लगना, उच्च रक्तचाप या मधुमेह, शराब पीना या धूम्रपान करना है।


देश में सुनने से लाचार नौजवानों की बहुत बड़ी आबादी है जिससे उनकी शारीरिक और आर्थिक सेहत पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। बीमारी कोक के अनुसार समय से रोग की पहचान और बहरेपन का इलाज बहुत ही आवश्यक है। अपने जीवन के प्रारंभिक चरण में मिली उचित सहायता से बच्चे अपनी कमी से उबरकर तेजी से बोलना और बातचीत करना सीख सकते हैं। इससे उसे समाज की मुख्य धारा का अंग बनने का भी मौका मिलता है।

 

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