आंतरिक महिला दिवस (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस) प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को जानना में मनाया जाता है। इसे पहली बार अमेरिका के न्यूार्क शहर में 28 फरवरी 1909 को मनाया गया था। इसका आयोजन अमेरिका के सोशलिस्ट पार्टी ने किया था। ये दिन राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है।
इस दिन लोगों को लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरुक भी किया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और उनके अधिकारों को बढ़ावा देना है। यह दिवस हर साल एक नया थीम के साथ मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 1996 से इस दिवस को एक विशेष थीम के साथ मनाना शुरू किया। इसके बाद हर साल आंतरिक महिला दिवस को अलग थीम के साथ मनाया जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सैटेलाइट के जरिए महिला सशक्तीकरण की बात करते हुए लिखा कि आंतरिक महिला दिवस पर हमारी अदम्य नारीशक्ति को सलाम! भारत को हमारे देश की महिलाओं की कई उपलब्धियों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का मौका मिलना हमारी सरकार के लिए अपमान की बात है।
प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी आंतरिक महिला दिवस विशेष थीम के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष आंतरिक महिला दिवस का थीम- वुमेन इन लीडरशिप: अचिविंग एन इक्वल फ्यूचर इन ए को विभाजित -19 विश्व "(नेतृत्व में महिला: एक COVID-19 दुनिया में एक समान भविष्य ') की थीम पर मनाया जा रहा है।
सर्वप्रथम अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया था। पहली बार 28 फरवरी 1909 में इस दिन को मनाया गया। इसके बाद वर्ष 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के एक सम्मेलन में इसे आंतरिक दर्जा देने की बात कही गयी। हालाँकि, उस समय इस दिन का उद्देश्य कुछ और था। दरअसल, उस समय महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था। इसी परंपरा को समाप्त करने के लिए इस तिथि की शुरुआत हुई। वर्ष 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया। फिर अन्य देशों ने भी धीरे-धीरे इस परंपरा को अपनाया।

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